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स्थापना

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ स्वराज संस्थान संचयालनालय के अन्तर्गत उज्जैन से 2009 से संचालित हो रहा है । उज्जैन से रहते हुए सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी शकों से भारत को मुक्ति दिलाकर स्वतंत्रता संग्राम का सूत्रपात किया था और भारत की उस अभूतपूर्व विजय के उपलक्ष्य से नये संवत् का प्रवर्तन किया था । आज वह विक्रम संवत् के नाम से सर्वज्ञात है ।

वीर, साहसी, न्यायप्रिय, विवेकशील, दानी, विद्वान्, संस्कृति के उन्नयन में सदा तत्पर इत्यादि विभिन्न विशेषताओं के कारण विक्रमादित्य की अति देश-विदेश के आम तथा खास वर्ग से सदा से रही है । ऐसे अप्रतिम महानायक तथा उनके युग के विषय से अधिकाधिक अन्वेषण के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, संस्कृति मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा और उज्जैन विकास प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष तथा म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम लि के वर्तमान अध्यक्ष श्री मोहन यादवजी की सदाकांक्षा और सद्प्रयत्नों के फलस्वरूप इस शोधपीठ की स्थापना हुई और वह अपने लक्ष्य की ओर सतत गतिशील है ।

शोधपीठ शोध करता, करवाता और नये नये अन्वेषणों को प्रकाश में लाता है । ऐसे नये नये तथ्यों को प्रकाश में लाने के लिए शोधपीठ की एक शोध पत्रिका की अपेक्षा के अनुरूप इस षष्णमासिक विक्रमार्क शोध पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है ।

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